अपने होने की तमन्ना थी, या जुदा होने का क़रार था,
क्यूँ जुदा हो गए हम तुम से — क्या यही प्यार था।
महफ़िलों में जो रहे मशग़ूल, यही जिनका व्यवहार था,
हर जुदाई पे दिल का टूटना — क्या यही प्यार था।
गर तुम भी जुदा न होते, क्या रस्मों से इंकार था,
मिल के फिर यूँ बिछड़ जाना — क्या यही प्यार था।
तेरी बेवफ़ाई में शायद तेरा वफ़ा भी शुमार था,
मेरी हर बात, हर उम्मीद — क्या यही प्यार था।
तेरी क़ुर्बत का जादू भी सर चढ़ के बोल रहा था,
मेरे हिस्से में जो आया — क्या यही प्यार था।
मिल के बिछड़ जाना फिर मिलने से भी कतराना,
कुछ न कहना, चुप रह जाना — क्या यही प्यार था।
वक़्त ने भी न निभाया कोई रिश्ता इस बार,
जो मिला वो भी बस इक इम्तिहान — क्या यही प्यार था।
ख़्वाब आँखों में रहे, हाथ में कुछ भी न रहा,
उम्र भर का यही सामान — क्या यही प्यार था।
अमृत, जिस रिश्ते में बस दर्द का ही अधिकार था,
नाम उसका भी मोहब्बत था — क्या यही प्यार था।
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Awesome lines Mr. Gogia
ReplyDeleteThank you so much Ashutosh ji
DeleteVery true & harttuching lines
ReplyDeleteThank you so much for your wonderful comments and inspiration
Deleteइसी ख्याल से गुज़री है शामे-दर्द-अक्सर;
ReplyDeleteकी दर्द हद से जो गुज़रेगा मुस्कुरा दूँ गा।
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